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આ લોકો પર કોઈનાં દુ:ખની અસર થતી નથી
इन लोगों पर नहीं होता किसी के दुख का असर
These people are not affected by anyone's grief

13:23 18/06/2020
चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ के एक श्लोक में ऐसे लोगों का वर्णन किया है जिन पर किसी दूसरे व्यक्ति के दुख का कोई असर नहीं होता...

1. राजा यानी शासन व्यवस्था को कभी किसी व्यक्ति के दुख का कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि वह कानून के नियमों में बंधा होता है और उसके आगे दुख व भावनाओं को नजरअंदाज कर देता है.

2. वैश्या को सिर्फ अपने काम से मतलब होता है, उसे इस बात का कोई फर्क नहीं होता कि दूसरा व्यक्ति कितना दुखी है या उसकी पीड़ा कितनी है.

3. यमराज पर लोगों के दुख-दर्द का कोई प्रभाव नहीं पड़ता. लोगों की भावनाओं को परे रखते हुए समय आने पर वो प्राण हर ही लेते हैं. अगर वो लोगों के दुख को समझने लगे तो किसी की मौत ही नहीं होगी.

4. अग्नि मनुष्य के दुख-दर्द से बेपरवाह होती है, आग की प्रवृति सबकुछ जला डालने की है. अग्नि जिंदा रहने के लिए जितनी जरूरी है उतनी ही खतरनाक भी, उस पर किसी के दुख-दर्द का कोई असर नहीं होता.

5. चोर किसी की पीड़ा नहीं समझते. उसका एक ही लक्ष्य होता है चोरी करना. उसके चोरी से सामने वाले के साथ कितनी बड़ी परेशानी हो सकती है इससे उसे कोई मतलब नहीं होता.

6. चाणक्य ने बच्चों को भी शामिल किया है. वो कहते हैं कि बच्चों को किसी की परेशानी से कोई मतलब नहीं होता. वो नादान होते हैं और इसलिए लोगों की भावनाओं को नहीं समझ पाते.

7. भिक्षु यानी मांगने वाला व्यक्ति सिर्फ अपने से मतलब रखता है, उस पर दूसरों का दुख का प्रभाव नहीं पड़ता.

8. ग्रामकंटक यानी गांव के लोगों को परेशान करने वाले लोगों पर किसी दूसरे की पीड़ा का असर नहीं होता. वो किसी भी रूप में लोगों को परेशान करते हैं.