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राज्य के 39.9 प्रतिशत परिवार केवल एक रुम के मकान में रहने को मजबूर

अहमदाबाद: राज्य के अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, वडोदरा और गांधीनगर निकट की गिफ्ट सिटी की गगनचुंबी इमारतों के बीच गुजरात में 48.1 प्रतिशत परिवार ही पक्के मकान में जीवन निर्वाह कर रहे है जबकि 51.9 प्रतिशत परिवार को कच्चे मकान में आसरा लेना पड रहा हैं। भारत सरकार ने प्रकाशित की सेम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-एसआरएस की ताजा रिपोर्ट में राज्य के सवा करोड से अधिक परिवार में से 39.9 प्रतिशत एक कमरे के मकान में निवास करते होने की रिपोर्ट जारी की है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी पक्के मकानों की श्रेणी में गुजरात की स्थिति श्रेष्ठ नहीं है। भारत के 52.2 प्रतिशत परिवार पक्के मकानों में रहते हैं, जबकि गुजरात का यह औसत 48.1 प्रतिशत पर ही अटका है। इसके बावजूद देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान की श्रेणी में गुजरात की स्थिति श्रेष्ठ देखने मिली होने की रिपोर्ट गृह मंत्रालय अंडर के जनगणना विभाग ने दी हैं। बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओरिस्सा और पश्चिम बंगाल की अपेक्षा गुजरात के ग्रामीण विस्तारों में पक्के मकानों की संख्या सबसे अधिक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में आधे पक्के मकानों के प्रमाण का औसत प्रतिशत 19.8 प्रतिशत और कच्चे मकानों का 28 प्रतिशत हैं। जिसके सामने गुजरात में क्रमश: 29.8 प्रतिशत और 22.4 प्रतिशत का प्रमाण होने का रिपोर्ट में दर्शाया गया हैं।
भारत में औसतन 33.1 प्रतिशत परिवार एक रूम के मकान में जीवन निर्वाह कर रहे है इसके सामने गुजरात में 39.9 प्रतिशत के पास एक रूम के मकान है। बिहार में यह प्रमाण 44.3 प्रतिशत, तमिलनाडु का 47 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल का करीब 42.7 प्रतिशत ऊंचा प्रमाण है।

 

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