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आपके निद्राधीन की पद्धति लाती हैं सुख - समृद्धि

हमारी जीवन शैली अपने लिए सुखाकारी का मापदंड बन जाती है आपकी लाइफ स्टाइल जैसी होती हैं उसमें भी आपकी निद्राधीन होने की अवस्था शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इसमें चुम्बकत्व के प्राकृतिक और भौतिकशास्त्र का नियम लागू होता हैं। आपके निद्राधीन होने की अवस्था यदि उचित (योग्य) हो तो आपके लिए सभी प्रकार से लाभदायी साबित होगी। यह मुद्दा अंधविश्वास का नहीं लेकिन तर्क आधारित याने कि लोजिकल है। हम लोग कितने ही मॉडर्न बन जाये लेकिन कुछ ऐसी पद्धतियों का ज्ञान लेंगे जो लाभदायी के साथ साथ सुख- समृद्धि लानेवाली होंगी।
निद्राधीन होने की पद्धति में उत्तर दक्षिण ध्रुव की स्थिति अच्छा रोल अदा करती हैं। योग्य कोने में सोया जावे तो वातावरण में उर्जा के साथ हमारा तालमेल हो जाने के कारण हमको फायदा होता हैं। दक्षिण दिशा तरफ पांव रखकर सोने से चुम्बकत्व का दक्षिण ध्रुव नकारात्मक उर्जा उद्दपित करता हैं जिसका सीधा प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता हैं और तबियत खराब होती हैं।
दक्षिण दिशा में पांव कर कभी सोना नहीं चाहिए क्योकि इसके हिसाब से मस्तिष्क पर निरंतर भार जैसा महसूस होगा। मन भी व्यग्र रहेगा। शांति फुर हो गई हो ऐसा लगेगा, दिल की प्रक्रिया भी ठीक रहती नहीं, इससे डरावने और एकदम हताश हो जाये ऐसे सपने आएंगे।
शारीरिक रचना के हिसाब से चुंम्बकत्व की दृष्टि से हमारे शरीर का सिर का हिस्सा उत्तर ध्रुव और पांव का हिस्सा दक्षिण ध्रुव है मतलब सबसे अच्छा रहेगा कि पांव उत्तर में रहे और सिर दक्षिण में रहे इस तरह से सोना सबसे बेस्ट हैं इसके कारण आपकी प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती हैं। मतलब कि आप जब भी सोए लेकिन पांव और सिर की दिशा उपरोक्त मुताबिक रखकर सोए जिससे आपको लाभ ही लाभ होगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी फलित हुआ हैं कि दक्षिण दिशा तरप पांव रखकर सोने से शारीरिक उर्जा का क्षय होता हैं। सवेरे उठते ही थकान सी महसूस होती हैं। हमारे शरीर और सिर पर कुप्रभाव पड़ते हैं इससे उल्टा दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोनेवाला इंसान प्रात:काल में उठता हैं, तब तरोताजगी का अनुभव करता हैं।
इसी क्रम में पूर्व और पश्चिम दिशा में पैर व माथा (सिर) रखकर सोना वास्तुशास्त्र के अनुसार अयोग्य माना जाता हैं। इस तरह से सोनेवाले का मन उचाट और उद्वेग में रहता हैं। मन की शक्ति पर्याप्त रूप से बाहर आ सकती नहीं पूर्व पश्चिम पोजिशन उत्तर दक्षिण ध्रुव के साथ क्रोस में होने से इस स्थिति में पांव और सिर रखना मानसिक अथवा अन्य रूप से योग्य नहीं हैं अत: इस दिशा में सोने का टालना चाहिए।
जिस किसी दिशा में आप निद्राधीन होये लेकिन सिर का संदर्भ उत्तर दक्षिण ध्रुव की स्थिति एक दूसरे के विरुद्ध दिशा में होनी चाहिए। जिसकी वजह से घर में सुख-समृद्धि भी रहती हैं। मन शांत रहने की वजह से कामकाज में भी मन लगता हैं। इस तरह सोते समय पांव- सिर (माथा) की दिशा भी सुनिश्चित करना चाहिए। उत्तर दिशा तरफ धनात्म शक्ति का प्रवाह बहता हैं जबकि दक्षिण से उत्तर तरफ ऋणात्मक शक्ति का प्रवाह बहता हैं। हमारे शरीर के सिर (माथे) के हिस्से से घनात्मक और पैरो से ऋणात्मक शक्ति का प्रवाह बहता हैं।

 

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