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कमूरता शुरू : शुभ कार्य पर 4 महीने का विराम

अहमदाबाद: गत चार महिना से जगह-जगह शादी-ब्याह, बारात की रौनक देखने मिल रही थी, वह अब देखने को मिलेगी नहीं। ज्योतिषशास्त्री के अनुसार देवपोडी (देवउठी) एकादशी पश्चात भगवान विष्णु का शयन काल शुरू हो जाता हैं। इसलिए इसके बाद शादी-ब्याह सहित के शुभ कार्य हो नहीं सकते। शादी के लिए अंतिम महूरत बिते दिन ही था। इसके बाद शादी-ब्याह सहित के शुभकार्य के लिए 11 नवम्बर तक का इंतजार करना पड़ेगा।
मिली जानकारी के अनुसार हिन्दू मान्यता के मुताबिक अषाढ़ी शुक्लपक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु जी के शयनकाल का प्रारंभ हो जाता हैं। चार महीने के शयनकाल बाद दिपावली पश्चात आनेवाली प्रबोधिनी एकादशी को भगवान विष्णु निन्द्रा से जागते हैं। इस दिन को तुलसी विवाह अथवा देवउठी एकादशी भी कहा जाता हैं। तिथि के अनुसार देवपोढी 15 जुलाई की रात्रि को 12.14 बजे से 16 जुलाई की रात्रि 2.08 बजे तक रहेगी। जबकि देवउठी एकादशी चार महिने बाद 11 नवम्बर अर्थात शुक्रवार के दिन आयेगी। देवशयनी एकादशी के दूसरे दिन अर्थात 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में संक्राति करेगा। इसके बाद सूर्य छह माह तक दक्षिणायान में रहेगा और 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा और इसे उत्तरायण कहा जाता हैं। उल्लेखनीय हो कि ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया हैं। यह व्रत करने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती हैं और पापों का नाश होता हैं। इसके अलावा तमाम व्रतों में देवशयनी के व्रत को सर्वाधिक श्रेष्ठ माना गया हैं। इस दिन विष्णुजी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व हैं।

 

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